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उम्र बढ़ने के साथ पुरुष फर्टिलिटी में क्या बदलाव आते हैं?

उम्र बढ़ने के साथ पुरुषों की फर्टिलिटी में कई प्राकृतिक और शारीरिक बदलाव आते हैं। स्पर्म की संख्या, गति, गुणवत्ता और टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का स्तर धीरे-धीरे कम होने लगता है, जिससे गर्भधारण की संभावना प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा, यौन इच्छा, ऊर्जा और इरेक्शन से जुड़ी समस्याएँ भी बढ़ सकती हैं। 

हालाँकि ये बदलाव धीरे होते हैं, लेकिन लंबे समय में इनका असर साफ दिखाई देता है। सही जानकारी, संतुलित आहार, स्वस्थ जीवनशैली और समय पर जांच से पुरुष अपनी प्रजनन क्षमता को लंबे समय तक बेहतर बनाए रख सकते हैं।

इस लेख में हम समझेंगे कि उम्र बढ़ने पर पुरुष फर्टिलिटी में क्या-क्या बदलाव आते हैं, इसके कारण क्या हैं और इसे बेहतर बनाए रखने के उपाय क्या हैं।

पुरुष फर्टिलिटी क्या है ? 

पुरुष फर्टिलिटी का मतलब है पुरुष की संतान उत्पन्न करने की क्षमता। यह मुख्य रूप से स्वस्थ, सक्रिय और सही आकार के स्पर्म बनने पर निर्भर करती है। स्पर्म की संख्या, गति, गुणवत्ता और डीएनए स्वास्थ्य इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हार्मोन संतुलन, जीवनशैली, आहार और शारीरिक स्वास्थ्य पुरुष फर्टिलिटी को सीधे प्रभावित करते हैं।

उम्र बढ़ने के साथ पुरुष फर्टिलिटी में आने वाले बदलाव: 

स्पर्म की संख्या और मात्रा में कमी

  • जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, शुक्राणुओं की कुल संख्या (स्पर्म काउंट) धीरे-धीरे कम हो जाती है।
  • 40-45 साल के बाद युवा पुरुषों की तुलना में स्पर्म काउंट काफी कम पाया जाता है।
  • स्पर्म कम होने से गर्भ ठहरने की संभावना घट जाती है।
  • गिरावट तेज नहीं होती, लेकिन लंबे समय में असर साफ दिखता है।
  • केवल संख्या ही नहीं, स्पर्म की गति (मोटिलिटी) भी कम हो जाती है।
  • स्वस्थ स्पर्म को तेजी से तैरकर महिला के अंडे (एग) तक पहुंचना पड़ता है।
  • उम्र बढ़ने पर स्पर्म धीमे हो जाते हैं, जिससे वे एग तक पहुंच नहीं पाते।
  • धीमी गति वाले स्पर्म से गर्भधारण मुश्किल हो जाता है, भले ही संख्या ठीक हो।

शुक्राणु के गुण और आकार में बदलाव 

  • उम्र के साथ स्पर्म का आकार और बनावट (shape) खराब होने लगती है।
  • स्पर्म का सिर, पूंछ या बीच का हिस्सा असामान्य हो सकता है।
  • ऐसे असामान्य स्पर्म एग को फर्टिलाइज (निषेचित) नहीं कर पाते।
  • सामान्य आकार वाले स्पर्म 4-18% तक कम हो जाते हैं।
  • इससे गर्भ ठहरने में ज्यादा समय लगता है और सफलता कम होती है।
  • 40 साल के बाद यह बदलाव ज्यादा स्पष्ट दिखता है।

स्पर्म डीएनए में क्षति 

  • उम्र बढ़ने पर स्पर्म के अंदर मौजूद डीएनए को नुकसान होने लगता है।
  • इससे गर्भ ठहरने में देरी हो सकती है।
  • गर्भपात (मिसकैरेज) का खतरा बढ़ सकता है।  
  • बच्चे में कुछ जेनेटिक समस्याओं का जोखिम थोड़ा बढ़ सकता है।

टेस्टोस्टेरोन हार्मोन और सेक्सुअल हेल्थ पर असर

  • टेस्टोस्टेरोन पुरुषों का मुख्य हार्मोन है, जो सेक्स ड्राइव, इरेक्शन, ऊर्जा और स्पर्म निर्माण से जुड़ा होता है।
  • 30-35 साल के बाद इसका स्तर हर साल लगभग 1% तक घटने लगता है।
  • कम टेस्टोस्टेरोन से सेक्स इच्छा (लिबिडो) कम हो जाती है।
  • इससे इरेक्शन (ईडी) की समस्या हो सकती है।
  • थकान, कमजोरी और मूड खराब रहने लगता है।
  • स्पर्म उत्पादन प्रभावित होता है।
  • ये सभी बदलाव मिलकर फर्टिलिटी को कम कर देते हैं।

गर्भ ठहरने में समय लगना या समस्या आना

  • युवा पुरुषों की तुलना में 40+ उम्र के पुरुषों के साथ गर्भ ठहरने में ज्यादा समय लगता है।
  • इसके कई कारण हैं जैसे- स्पर्म संख्या, गति, आकार और डीएनए में आई कमी।
  • कई अध्ययनों में पाया गया कि 45+ उम्र में 5 गुना ज्यादा समय लग सकता है।
  • प्रयास ज्यादा करने पड़ते हैं, और सफलता की संभावना 30% तक कम हो सकती है।

अन्य समस्याएं

➤ इरेक्शन और यौन प्रदर्शन में कमी

  • उम्र के साथ शरीर में रक्त प्रवाह कम हो सकता है।
  • नसों की संवेदनशीलता भी घट जाती है।
  • इससे इरेक्टाइल डिसफंक्शन (ईडी) की समस्या हो सकती है।
  • इरेक्शन ठीक न होने से यौन संबंध बनाना मुश्किल होता है।
  • इससे गर्भधारण की संभावना प्रभावित होती है।

➤ मानसिक तनाव और आत्मविश्वास में कमी

  • उम्र के साथ काम का दबाव और जिम्मेदारियाँ बढ़ जाती हैं।
  • इससे मानसिक तनाव बढ़ता है।
  • तनाव हार्मोन संतुलन बिगाड़ देता है।
  • इससे सेक्स इच्छा और स्पर्म उत्पादन प्रभावित होता है।
  • यौन कमजोरी या फर्टिलिटी समस्या होने पर आत्मविश्वास कम हो जाता है।
  • आत्मविश्वास की कमी समस्या को और बढ़ा देती है।

उम्र बढ़ने के साथ पुरुष फर्टिलिटी को बेहतर बनाए रखने के उपाय: 

स्वस्थ वजन बनाए रखें

  • मोटापा (उच्च BMI) टेस्टोस्टेरोन कम करता है और स्पर्म काउंट घटाता है।
  • संतुलित वजन रखने से स्पर्म क्वालिटी बेहतर रहती है।

पौष्टिक आहार अपनाएं

एंटीऑक्सिडेंट ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से स्पर्म को बचाते हैं, जो उम्र के साथ बढ़ता है।

  • हरी सब्जियां, फल (बेरीज, केला, अनार), नट्स (अखरोट, बादाम), मछली, साबुत अनाज।
  • जिंक (कद्दू के बीज, मीट, दालें), विटामिन C, विटामिन D, विटामिन E, ओमेगा-3, CoQ10, फोलिक एसिड से भरपूर भोजन।
  • प्रोसेस्ड फूड, ज्यादा चीनी, ट्रांस फैट और रेड मीट कम करें।

नियमित व्यायाम करें

  • वेट लिफ्टिंग, जॉगिंग, योग या ब्रिस्क वॉकिंग जैसे मॉडरेट व्यायाम टेस्टोस्टेरोन बढ़ाते हैं और स्पर्म प्रोडक्शन सुधारते हैं।
  • ज्यादा तीव्र व्यायाम या साइकिलिंग (लंबे समय तक) से बचें, क्योंकि इससे स्क्रोटम गर्म हो सकता है।

धूम्रपान, शराब और ड्रग्स छोड़ें

  • स्मोकिंग स्पर्म काउंट और डीएनए डैमेज बढ़ाती है।
  • ज्यादा शराब स्पर्म क्वालिटी घटाती है।
  • ये आदतें छोड़ने से सबसे तेज सुधार दिखता है।

गर्मी से बचाव 

  • टाइट अंडरवियर, लंबे समय तक बैठना, सौना, हॉट टब, लैपटॉप को गोद में रखना – ये सब स्पर्म प्रोडक्शन कम करते हैं।
  • लूज अंडरवियर पहनें और स्क्रोटम को ठंडा रखें।

तनाव कम करें और अच्छी नींद लें

  • ज्यादा तनाव कोर्टिसोल बढ़ाता है, जो टेस्टोस्टेरोन घटाता है।
  • मेडिटेशन, योग, 7-8 घंटे की नींद बहुत मदद करती है।

एंटीऑक्सिडेंट सप्लीमेंट्स (डॉक्टर की सलाह से)

  • विटामिन C, E, जिंक, सेलेनियम, ओमेगा-3  – कई अध्ययनों में स्पर्म मोटिलिटी और क्वालिटी में सुधार दिखाया है।
  • लेकिन बिना डॉक्टर/एंड्रोलॉजिस्ट की सलाह के न लें।

अन्य महत्वपूर्ण उपाय

  • पर्यावरणीय टॉक्सिन्स (पेस्टिसाइड्स, केमिकल्स) से बचें।
  • अगर वैरिकोसील है, तो उसका इलाज (varicocelectomy) स्पर्म क्वालिटी सुधार सकता है।
  • अगर प्लानिंग लेट है, तो 30-35 की उम्र में स्पर्म फ्रीजिंग (क्रायोप्रिजर्वेशन) एक अच्छा विकल्प हो सकता है।

उम्र के अनुसार फर्टिलिटी का आसान चार्ट:

  • 20-30 साल: फर्टिलिटी सबसे अच्छी। स्पर्म क्वालिटी टॉप पर।
  • 30-35 साल: हल्की गिरावट शुरू। मोटिलिटी और डीएनए में छोटे बदलाव।
  • 35-40 साल: स्पष्ट कमी। गर्भ ठहरने में थोड़ी देरी।
  • 40-45 साल: 30% कम चांस। डीएनए डैमेज बढ़ना।
  • 45-50 साल: काफी मुश्किल। बच्चे के स्वास्थ्य रिस्क।
  • 50+ साल: स्पर्म वॉल्यूम, मोटिलिटी बहुत कम। डीएनए क्षति ज्यादा।

ये बदलाव हर आदमी में एक जैसे नहीं होते। अगर आप स्वस्थ जीवन जीते हैं, तो गिरावट कम हो सकती है।

निष्कर्ष

उम्र बढ़ने के साथ पुरुषों की फर्टिलिटी में बदलाव आना स्वाभाविक है। स्पर्म की संख्या, गति, गुणवत्ता और हार्मोन स्तर धीरे-धीरे कम हो सकते हैं, जिससे गर्भधारण में कठिनाई आ सकती है। इसके अलावा, बच्चे के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ने की सम्भावना होती है।  

पुरुष अपनी इस समस्या को सही जीवनशैली, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, तनाव नियंत्रण और आयुर्वेदिक तत्वों की सहायता से लंबे समय तक अपनी फर्टिलिटी और यौन स्वास्थ्य को बनाए रख सकते हैं।