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गोखरू और कौंच बीज से कैसे पाएं यौन कमजोरी में राहत?

यौन कमजोरी आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में आम होती जा रही है। तनाव, गलत खानपान, नींद की कमी और हार्मोनल असंतुलन इसके मुख्य कारण हैं। लेकिन आयुर्वेद में कुछ ऐसी शक्तिशाली औषधियां बताई गई हैं जो इस कमजोरी को जड़ से खत्म कर सकती हैं। गोखरू और कौंच के बीज ऐसी ही दो चमत्कारी जड़ी-बूटियाँ हैं, जो पुरुषों की यौन शक्ति को प्राकृतिक रूप से बढ़ाती हैं।

इस लेख में जानिए कि गोखरू और कौंच के बीज के फायदे क्या हैं, इन्हें कैसे सेवन करें और किस तरह ये यौन समस्याओं में राहत पहुंचाते हैं।

गोखरू क्या है?

गोखरू एक प्रसिद्ध आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है जिसे Tribulus Terrestris कहा जाता है। इसका उपयोग शारीरिक ताकत, यौन शक्ति और मूत्र संबंधी समस्याओं के इलाज में वर्षों से किया जा रहा है। 

कौंच बीज क्या है?

कौंच बीज को Mucuna pruriens भी कहा जाता है। इसे आयुर्वेद में एक शक्तिवर्धक और यौन टॉनिक माना गया है। इसमें L-DOPA नामक यौगिक होता है जो डोपामिन को बढ़ाता है, जिससे मानसिक और शारीरिक दोनों तरह की शक्ति मिलती है।

गोखरू और कौंच के बीज के फायदे पुरुषों के लिए

परंपरागत आयुर्वेदिक ज्ञान से लेकर आधुनिक विज्ञान तक, गोखरू और कौंच बीज अनेक स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है यह निम्न रूप से संपूर्ण स्वास्थ्य और जीवन को सुधारने में सहायक हो सकता है:

1. टेस्टोस्टेरोन हार्मोन को बढ़ाना

गोखरू और कौंच बीज में ऐसे प्राकृतिक तत्व होते हैं जो पुरुषों के शरीर में पौरुष हार्मोन (टेस्टोस्टेरोन) के स्तर को संतुलित और बढ़ाने का काम करते हैं। यह हार्मोन पुरुषों की यौन इच्छा, मांसपेशियों की शक्ति और मानसिक ऊर्जा का मुख्य स्रोत होता है। इन बीजों के नियमित सेवन से शरीर की जैविक क्रियाएँ सक्रिय होती हैं और यौन ऊर्जा में तेज़ी से वृद्धि होती है।

टेस्टोस्टेरोन का स्तर गिरने से पुरुषों को थकान, यौन इच्छा की कमी, कमजोरी और मानसिक तनाव जैसी समस्याएं घेर लेती हैं। ऐसे में गोखरू और कौंच के बीज का सेवन शरीर को भीतर से बलवान बनाता है और प्राकृतिक तरीके से पौरुष क्षमता को पुनः जागृत करता है।

2. यौन कमजोरी और थकावट को दूर करना

भागदौड़ भरी ज़िंदगी, गलत खानपान और लगातार मानसिक तनाव के कारण शरीर में यौन दुर्बलता पैदा हो जाती है। ऐसे में गोखरू और कौंच के बीज शरीर को अंदर से पोषण देता है और थकावट, कमजोरी जैसी समस्याओं को जड़ से मिटाता है। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत करते हैं।

इन बीजों का सेवन नियमित रूप से करने से शरीर में नई ऊर्जा और शक्ति का संचार होता है, जिससे पुरुष न केवल यौन रूप से सक्रिय रहते हैं, बल्कि दैनिक जीवन की थकावट और मानसिक सुस्ती भी दूर होती है। यह सम्पूर्ण पुरुष स्वास्थ्य के लिए एक प्राकृतिक संजीवनी की तरह काम करते हैं।

3. शीघ्रपतन की समस्या में राहत

शीघ्रपतन पुरुषों की आम समस्याओं में से एक है, जिसमें संभोग के समय पुरुष बहुत जल्दी वीर्य स्खलन कर देते हैं। यह स्थिति आत्मविश्वास को कम कर देती है और वैवाहिक जीवन पर भी असर डाल सकती है। कौंच बीज विशेष रूप से वीर्य को गाढ़ा और स्थिर बनाते हैं, जिससे यह समस्या धीरे-धीरे कम होने लगती है।

गोखरू शरीर के भीतर संतुलन बनाकर नाड़ियों की शक्ति को बढ़ाता है, जिससे यौन उत्तेजना को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। इन दोनों बीजों का संयोजन शीघ्रपतन को दूर करने में अत्यंत प्रभावी माना गया है। इसका सेवन आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में सदियों से किया जा रहा है।

4. वीर्य की गुणवत्ता और मात्रा में वृद्धि

शुक्राणुओं की संख्या, गुणवत्ता और गति पुरुष प्रजनन क्षमता में अहम भूमिका निभाते हैं। जब ये कमजोर हो जाते हैं तो गर्भधारण की संभावना कम हो जाती है। गोखरू और कौंच बीज शरीर में पौष्टिकता को बढ़ाकर शुक्राणुओं की गुणवत्ता में सुधार करते हैं।

यह बीज शरीर की जड़ प्रणाली को मजबूत करते हैं, जिससे वीर्य गाढ़ा, शक्तिशाली और जीवंत बनता है। साथ ही, इनमें प्राकृतिक वीर्यवर्धक गुण होते हैं, जो संतान की चाह रखने वाले दंपत्तियों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होते हैं।

5. नपुंसकता और लिंग में तनाव की कमी में लाभकारी

लिंग में तनाव की कमी या दुर्बलता एक ऐसी समस्या है जो पुरुषों को गहरे मानसिक और वैवाहिक तनाव में डाल सकती है। यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब लिंग में पर्याप्त रक्त प्रवाह नहीं होता या मानसिक तनाव के कारण उत्तेजना में कमी आती है। गोखरू इस रक्त संचार को बढ़ाने में मदद करता है।

कौंच बीज मन को शांत करते हैं और नाड़ी-तंत्र को संतुलित करके यौन उत्तेजना को नियंत्रित रखते हैं। दोनों औषधियाँ मिलकर लिंग की दृढ़ता और स्थायित्व को सुधारती हैं, जिससे पुरुषों का आत्मविश्वास भी बढ़ता है और यौन जीवन में सकारात्मक बदलाव आता है।

6. बांझपन के उपचार में सहायक

गोखरू और कौंच बीज का उपयोग उन पुरुषों के लिए विशेष लाभदायक माना गया है जो संतान प्राप्ति में कठिनाई महसूस करते हैं। ये बीज शरीर के भीतर प्रजनन अंगों को पोषण देकर शुक्राणुओं की संख्या और शक्ति में सुधार करते हैं, जिससे संतान उत्पत्ति की संभावना बढ़ जाती है।

बांझपन की समस्या केवल शारीरिक नहीं होती, बल्कि मानसिक तनाव और आत्मविश्वास की कमी से भी जुड़ी होती है। इन बीजों का सेवन न केवल शारीरिक कारणों को ठीक करता है, बल्कि मानसिक रूप से भी पुरुषों को संतुलित और सशक्त बनाता है।

7. तनाव और मानसिक चिंता को कम करना

आज के समय में मानसिक तनाव, चिंता और अवसाद यौन जीवन को गहराई से प्रभावित करते हैं। कौंच बीज में प्राकृतिक तत्व होते हैं जो मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को संतुलित करते हैं और चिंता को शांत करते हैं। इससे व्यक्ति मानसिक रूप से शांत और संतुलित रहता है।

तनावमुक्त शरीर और मन ही संतुलित यौन जीवन की कुंजी हैं। गोखरू मन में सकारात्मकता और ऊर्जा भरता है, जिससे व्यक्ति आत्मविश्वास से भरपूर महसूस करता है और यौन क्रिया के दौरान तनाव रहित रहता है।

8. प्राकृतिक यौन टॉनिक और शक्तिवर्धक प्रभाव

आयुर्वेद में गोखरू और कौंच बीज को प्राकृतिक यौन टॉनिक माना गया है। यह न केवल यौन दुर्बलता को दूर करता है बल्कि शरीर की समग्र शक्ति, ओज और उत्साह को भी बढ़ाता है। इनके सेवन से व्यक्ति को आंतरिक मजबूती और यौन ऊर्जा में तीव्र सुधार महसूस होता है।

यह बीज पुरुषों को वृद्धावस्था तक यौन रूप से सक्रिय बनाए रखने में मदद करते हैं। यह संपूर्ण जीवनशैली को बेहतर बनाते हैं और थकावट, कमजोरी या यौन अरुचि जैसी समस्याओं को दूर करते हैं। इसलिए इन्हें प्राकृतिक बलवर्धक औषधि भी कहा जाता है।

9. मांसपेशियों की ताकत और सहनशक्ति में वृद्धि

शरीर की मांसपेशियाँ और हड्डियाँ यदि मजबूत हों, तो व्यक्ति शारीरिक रूप से भी सक्रिय और सशक्त महसूस करता है। गोखरू और कौंच बीज मांसपेशियों को पोषण देकर उन्हें अधिक बलवान और लचीला बनाते हैं। इससे शरीर की सहनशक्ति बढ़ती है।

यह केवल यौन क्षेत्र ही नहीं, बल्कि खेलकूद, योग और दैनिक गतिविधियों में भी व्यक्ति को अधिक ऊर्जावान और सहनशील बनाते हैं। आयुर्वेद में इन्हें दीर्घायु और कार्यक्षमता बढ़ाने वाली औषधियों में गिना जाता है।

गोखरू और कौंच के बीज के नुकसान और सावधानियाँ 

हालांकि गोखरू और कौंच बीज आयुर्वेद में यौन शक्ति और संपूर्ण स्वास्थ्य को बढ़ाने के लिए अत्यंत लाभकारी माने जाते हैं, लेकिन इनका अधिक या गलत तरीके से सेवन करने पर कुछ दुष्प्रभाव (नुकसान) भी हो सकते हैं। इसलिए इनका उपयोग करने से पहले सावधानी बरतना ज़रूरी है।

संभावित नुकसान:

  1. अधिक मात्रा में सेवन से पेट की समस्या: यदि इन बीजों का अत्यधिक सेवन किया जाए, तो कुछ लोगों को पेट दर्द, गैस, या अपच जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
  2. रक्तचाप पर प्रभाव: कौंच बीज का अत्यधिक सेवन कुछ लोगों में रक्तचाप को बढ़ा सकता है, खासकर यदि पहले से हाई ब्लड प्रेशर की समस्या हो।
  3. नींद में बाधा: कुछ मामलों में यह मानसिक उत्तेजना बढ़ा सकते हैं, जिससे नींद में खलल पड़ सकता है।
  4. गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को परहेज़: गर्भावस्था या स्तनपान के दौरान इन औषधियों का सेवन न करें, जब तक किसी योग्य आयुर्वेदाचार्य की सलाह न हो।
  5. हार्मोनल प्रभाव: लंबे समय तक बिना नियंत्रण सेवन करने से हार्मोनल संतुलन में बदलाव हो सकता है।

गोखरू और कौंच के बीज का सेवन कैसे करें?

आपकी सुविधा और शरीर की जरूरत के अनुसार, गोखरू और कौंच बीज को कई तरीकों से सेवन किया जा सकता है। यह बाजार में विभिन्न रूपों में उपलब्ध होते हैं – जैसे कि कच्चे बीज, चूर्ण (पाउडर), कैप्सूल, या काढ़ा।

1. चूर्ण (पाउडर) के रूप में

कौंच बीज और गोखरू का चूर्ण सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला रूप है।

  • दिन में दो बार, 3–5 ग्राम चूर्ण को गुनगुने दूध, पानी या शहद के साथ लें।
  • इसे सुबह खाली पेट और रात को सोने से पहले लिया जा सकता है।

2. कैप्सूल या टैबलेट के रूप में

जो लोग चूर्ण का स्वाद नहीं ले पाते, उनके लिए आयुर्वेदिक कंपनियाँ इन्हें कैप्सूल या टैबलेट के रूप में बनाती हैं।

  • इन्हें दिन में एक या दो बार, भोजन के बाद जल के साथ लिया जा सकता है।

3. काढ़ा या क्वाथ रूप में

गोखरू और कौंच के बीजों को पानी में उबालकर काढ़ा बनाकर भी पिया जा सकता है।

  • यह पाचन में सहायक होता है और औषधीय गुणों को शरीर में बेहतर तरीके से पहुंचाता है।

4. आयुर्वेदिक मिश्रणों में

कई बार इन्हें अन्य औषधियों के साथ मिलाकर शक्तिवर्धक योग, अवलेह या पाक के रूप में भी दिया जाता है, जैसे – अश्वगंधा पाक, कौंच पाक, गोखरू चूर्ण आदि।

निष्कर्ष 

गोखरू और कौंच के बीज के फायदे केवल यौन शक्ति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये संपूर्ण पुरुष स्वास्थ्य को सुधारते हैं। अगर आप यौन कमजोरी, शीघ्रपतन, कम इच्छा शक्ति या वीर्य की समस्या से परेशान हैं, तो ये दोनों औषधियाँ आपके लिए बेहद लाभकारी हो सकती हैं।

ध्यान देने योग्य बात यह है कि किसी भी औषधि का सेवन संतुलित मात्रा में और योग्य आयुर्वेदाचार्य की सलाह से ही करना चाहिए। साथ ही, स्वस्थ जीवनशैली, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और नियमित व्यायाम के साथ इन जड़ी-बूटियों का उपयोग किया जाए तो अधिक अच्छे और स्थायी परिणाम मिल सकते हैं।