इरेक्टाइल डिसफंक्शन के लिए 8 बेहतरीन योगासन: प्राकृतिक उपाय
इरेक्टाइल डिसफंक्शन के लिए 8 बेहतरीन योगासन: प्राकृतिक उपाय

इरेक्टाइल डिसफंक्शन के लिए 8 बेहतरीन योगासन: प्राकृतिक उपाय

इरेक्टाइल डिसफंक्शन (ED) तब होता है जब पुरुष को यौन संबंध बनाने के लिए आवश्यक इरेक्शन पाने या उसे बनाए रखने में कठिनाई होती है। ED होने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे बढ़ती उम्र, लंबे समय से चली आ रही बीमारियाँ, तनाव या गलत जीवनशैली।

कई पुरुष अपनी इरेक्शन की समस्या को संभालने के लिए दवाओं पर निर्भर रहते हैं, लेकिन वे यह नहीं जानते कि कुछ योगासन और जीवनशैली में बदलाव भी मनचाहा इरेक्शन पाने में मदद कर सकते हैं।

इसीलिए यहां हम इरेक्टाइल डिसफंक्शन के लिए कुछ बेहतरीन योगासन बता रहे हैं, जिन्हें अक्सर कम आंका जाता है, लेकिन ये पुरुषों के संपूर्ण यौन स्वास्थ्य में काफी मददगार साबित हो सकते हैं।

इरेक्टाइल डिसफंक्शन के लिए सर्वश्रेष्ठ योगासन

ये योगासन उन दवाओं का प्राकृतिक विकल्प हो सकते हैं, जिन पर ज़्यादातर पुरुष निर्भर रहते हैं। मजबूत इरेक्शन पाने के लिए बस कुछ आसान कदम अपनाने की जरूरत होती है।

1. पश्चिमोत्तानासन (बैठकर आगे झुकने का आसन)

पश्चिमोत्तानासन एक ऐसा योगासन है जो मन को शांत करता है और पूरे शरीर को स्ट्रेच देता है। यह तनाव, चिंता और हल्के अवसाद को कम करने में मदद करता है, जो अक्सर इरेक्टाइल डिसफंक्शन की समस्या को बढ़ा देते हैं।

यह आसन न केवल शरीर की लचीलापन बढ़ाता है, बल्कि पेल्विक क्षेत्र में रक्त प्रवाह को भी बेहतर करता है, जिससे लंबे समय तक इरेक्शन बनाए रखने और पुरुषों की ऊर्जा में सुधार हो सकता है।

करने की विधि:

  • फर्श पर बैठ जाएं और दोनों पैरों को सामने की ओर सीधा फैलाएं
  • शरीर को सीधा रखें और पैर की उंगलियां ऊपर की ओर रखें
  • गहरी सांस लें और दोनों हाथ ऊपर उठाएं
  • अब धीरे-धीरे आगे की ओर झुकें और पैर की उंगलियों को छूने की कोशिश करें
  • अगर उंगलियां न छू पाएं तो टखनों या पैरों को पकड़ लें
  • सिर को घुटनों के पास लाने का प्रयास करें
  • 20–30 सेकंड तक इसी स्थिति में रहें, फिर धीरे-धीरे वापस बैठ जाएं

2. सिद्धासन (परफेक्ट पोज़)

सिद्धासन एक प्राचीन ध्यान आसन है, जिसका अभ्यास सदियों से किया जा रहा है। यह पेल्विक क्षेत्र को सक्रिय करता है और नर्वस सिस्टम को शांत करता है, जिससे बेहतर इरेक्शन में मदद मिल सकती है।

यह आसन कूल्हों और पेल्विक मांसपेशियों के आसपास रक्त संचार को बेहतर बनाता है, जिससे यौन ऊर्जा संतुलित होती है और स्टैमिना बढ़ाने में सहायता मिलती है।

करने की विधि:

  • जमीन पर बैठकर दोनों पैरों को सीधा फैलाएं
  • बाएं पैर को मोड़कर एड़ी को गुप्तांग के पास रखें
  • अब दाएं पैर को मोड़कर उसकी एड़ी को बाएं टखने के ऊपर रखें
  • रीढ़ सीधी रखें और हाथ घुटनों पर रखें
  • आंखें बंद करें और धीरे-धीरे गहरी सांस लें
  • 2–5 मिनट तक इसी मुद्रा में बैठें

3. गरुड़ासन (ईगल पोज़)

गरुड़ासन एक संतुलन वाला योगासन है, जो पैरों और पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों को मजबूत करता है। यह आसन जननांग क्षेत्र में रक्त संचार को बेहतर बनाता है और इरेक्टाइल डिसफंक्शन को प्राकृतिक रूप से नियंत्रित करने में मदद करता है।

एकाग्रता बढ़ाने के साथ-साथ यह तनाव को कम करता है और मानसिक थकान दूर करता है, जिससे शारीरिक स्वास्थ्य में भी सुधार होता है।

करने की विधि:

  • सीधे खड़े हो जाएं और हाथ शरीर के बगल में रखें
  • घुटनों को थोड़ा मोड़ें
  • दाएं पैर को उठाकर बाएं पैर के ऊपर क्रॉस करें
  • संभव हो तो दाएं पैर को बाएं पिंडली के पीछे रखें
  • दोनों हाथ सामने की ओर फैलाएं और बाएं हाथ को दाएं हाथ के ऊपर क्रॉस करें
  • कोहनियों को मोड़ें ताकि हथेलियां आमने-सामने हों
  • 15–30 सेकंड तक धीरे-धीरे सांस लेते हुए रहें
  • वापस सामान्य स्थिति में आएं और दूसरी ओर से दोहराएं

4. अर्ध मत्स्येन्द्रासन (हाफ स्पाइनल ट्विस्ट)

अर्ध मत्स्येन्द्रासन एक बैठकर किया जाने वाला ट्विस्ट आसन है, जो पेट के अंगों और प्रजनन स्वास्थ्य को सक्रिय करता है। यह रीढ़ की लचीलापन बढ़ाता है और शरीर में जमा विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है।

यह आसन पेल्विक क्षेत्र में रक्त संचार को बढ़ाता है और प्रजनन प्रणाली को सक्रिय कर ऊर्जा और इरेक्शन क्षमता को बेहतर बनाता है।

करने की विधि:

  • फर्श पर बैठकर दोनों पैरों को सामने फैलाएं
  • दाएं पैर को मोड़कर बाएं पैर के बाहर जमीन पर रखें
  • बाएं पैर को मोड़कर उसकी एड़ी दाएं कूल्हे के पास रखें
  • रीढ़ को सीधा रखें
  • अब शरीर के ऊपरी हिस्से को दाईं ओर मोड़ें
  • संतुलन के लिए दायां हाथ पीछे जमीन पर रखें
  • बाएं कोहनी को दाएं घुटने के बाहर रखें
  • 20-30 सेकंड तक गहरी सांस लें
  • धीरे-धीरे वापस आएं और दूसरी ओर दोहराएं

5. शवासन (कॉर्प्स पोज़)

शवासन नर्वस सिस्टम को शांत करने और तनाव को कम करने के लिए किया जाता है, जो इरेक्टाइल डिसफंक्शन का एक बड़ा मानसिक कारण होता है। यह आसन मन और शरीर से चिंता और अवसाद को गहराई से बाहर निकालता है।

यह फोकस बेहतर करता है, भावनात्मक संतुलन लाता है और नींद की गुणवत्ता सुधारकर शरीर में नई ऊर्जा भरता है।

करने की विधि:

  • पीठ के बल जमीन पर लेट जाएं
  • पैर थोड़े अलग रखें और हाथ शरीर से दूर, हथेलियां ऊपर की ओर रखें
  • आंखें बंद करें
  • धीरे-धीरे सांस लें और सिर से पैर तक पूरे शरीर को ढीला छोड़ने की कल्पना करें
  • 5–10 मिनट तक इसी अवस्था में रहें

6. धनुरासन (बो पोज़)

धनुरासन पूरे शरीर को स्ट्रेच करता है और पीठ, कूल्हों व जांघों को मजबूत बनाकर यौन अंगों को सक्रिय करता है। यह पेल्विक क्षेत्र में रक्त प्रवाह बढ़ाता है, जिससे इरेक्शन की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है।

यह आसन पूरे शरीर की मांसपेशियों को आराम देता है, तनाव कम करता है, ऊर्जा स्तर बढ़ाता है और हार्मोन संतुलन व कामेच्छा में सुधार करता है।

करने की विधि:

  • पेट के बल लेट जाएं
  • घुटनों को मोड़ें
  • हाथों से टखनों को पकड़ें
  • सांस लेते हुए पैरों को ऊपर उठाएं
  • शरीर धनुष के आकार का दिखाई देगा
  • 15–20 सेकंड तक सांस लेते हुए रहें
  • धीरे-धीरे नीचे आएं और आराम करें

7. भुजंगासन (कोबरा पोज़)

भुजंगासन में शरीर पेट के बल रहता है और छाती ऊपर उठती है, जिससे शरीर कोबरा की तरह दिखाई देता है। यह आसन पेल्विक क्षेत्र में रक्त संचार बढ़ाता है और रीढ़ को मजबूत करता है।

यह छाती खोलता है, मूड बेहतर करता है और थकान दूर करता है, जिससे मानसिक और शारीरिक ताकत बढ़ती है और इरेक्शन की गुणवत्ता व समय में सुधार होता है।

करने की विधि:

  • पेट के बल लेटकर पैरों को पीछे फैलाएं
  • हथेलियों को कंधों के नीचे जमीन पर रखें
  • सांस लेते हुए धीरे-धीरे छाती ऊपर उठाएं
  • कोहनियों को हल्का मोड़कर कंधों को आराम दें
  • सामने या थोड़ा ऊपर देखें
  • 15–20 सेकंड बाद धीरे-धीरे वापस लेट जाएं

8. उत्तानासन (खड़े होकर आगे झुकने का आसन)

उत्तानासन रीढ़ और हैमस्ट्रिंग की लचीलापन बढ़ाता है। यह रक्त संचार बेहतर करके नर्वस सिस्टम को शांत करता है, जो हल्के इरेक्टाइल डिसफंक्शन में सहायक हो सकता है।

यह पाचन तंत्र को सक्रिय करता है, तनाव और चिंता को कम करता है और शरीर को गहराई से रिलैक्स करता है।

करने की विधि:

  • पैरों को थोड़ा अलग रखकर खड़े हो जाएं
  • सांस लेते हुए हाथ ऊपर उठाएं
  • सांस छोड़ते हुए कूल्हों से आगे झुकें
  • हाथों से जमीन या टखनों को पकड़ने की कोशिश करें
  • सिर को घुटनों के पास लाएं
  • 20–30 सेकंड तक इसी स्थिति में रहें

निष्कर्ष

इरेक्टाइल डिसफंक्शन हमेशा स्थायी समस्या नहीं होती। समय रहते सही कदम उठाने से इसे नियंत्रित या ठीक किया जा सकता है। दवाएं अस्थायी राहत दे सकती हैं, लेकिन ऊपर बताए गए योगासन जैसे पश्चिमोत्तानासन, सिद्धासन, गरुड़ासन, अर्ध मत्स्येन्द्रासन और शवासन, लंबे समय तक प्राकृतिक लाभ दे सकते हैं।

अगर इन योगासनों को स्वस्थ जीवनशैली, धूम्रपान से दूरी और शराब के सीमित सेवन के साथ अपनाया जाए, तो अच्छे परिणाम मिल सकते हैं। नियमित अभ्यास और धैर्य के साथ ये योगासन इरेक्टाइल डिसफंक्शन को प्राकृतिक रूप से सुधारने और यौन स्वास्थ्य बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं, जो हर पुरुष की इच्छा होती है।