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आयुर्वेद में सेक्स टाइमिंग और स्टैमिना बढ़ाने के तरीके

आजकल कई पुरुष शीघ्रपतन या कम सेक्स टाइमिंग की समस्या से परेशान रहते हैं। इससे आत्मविश्वास कम होता है, रिश्ते और मानसिक संतुलन पर भी असर पड़ता है। आयुर्वेद में इस समस्या का जड़ से इलाज संभव है। आयुर्वेद शरीर की कमजोरी, तनाव, वात दोष असंतुलन और शुक्र धातु की कमी को दूर करके सेक्स टाइमिंग बढ़ाने में मदद करता है। सही जड़ी-बूटियाँ, भोजन, योग और जीवनशैली अपनाकर सेक्स टाइमिंग को प्राकृतिक और सुरक्षित तरीके से बढ़ाया जा सकता है।

आयुर्वेद का दृष्टिकोण

आयुर्वेद शरीर को सात धातुओं में विभाजित करता है, जिनमें शुक्र धातु प्रजनन शक्ति और यौन क्षमता का आधार है। जब शुक्र धातु मजबूत होती है, तब व्यक्ति में ऊर्जा, आत्मविश्वास और सहनशक्ति बनी रहती है। आयुर्वेद का उद्देश्य केवल समय बढ़ाना नहीं, बल्कि पूरे शरीर और मन को संतुलित करना होता है। मुख्य समस्या वात दोष का शुक्र धातु में प्रवेश मानी जाती है, जो तनाव, कमजोरी और असंतुलित जीवन शैली से होती है। वाजीकरण चिकित्सा से शुक्र धातु को पोषण देकर स्टैमिना और टाइमिंग बढ़ाई जाती है।

आयुर्वेद के अनुसार सेक्स टाइमिंग कम होने के मुख्य कारण:

  • मानसिक तनाव और चिंता — चिंता, स्ट्रेस, भय या अवसाद से मन अशांत रहता है, जिससे वात दोष बढ़ता है और शुक्र धातु में प्रवेश करके वीर्य पर नियंत्रण तुरंत खो जाता है।  
  • कमजोर नसें और शरीर की कमजोरी — शुक्र धातु की क्षीणता, नाड़ियों की दुर्बलता या ओजस की कमी से शरीर वीर्य को रोकने में असमर्थ हो जाता है, मुख्यतः वात दोष के बढ़ने से नसें कमजोर पड़ती है।
  • हार्मोन असंतुलन — टेस्टोस्टेरोन जैसे यौन हार्मोन में कमी या संतुलन वात-पित्त दोष के बढ़ने से होता है, जिससे शुक्र धातु पतला और कमजोर हो जाता है तथा जल्दी स्खलन हो जाता है।
  • गलत खान-पान और नींद की कमी — अनियमित भोजन, ज्यादा तला-भुना/मसालेदार/ठंडा खाना, अनियमित समय पर भोजन और कम नींद से वात दोष तेजी से बढ़ता है, आम (विष) जमा होता है और शुक्र धातु कमजोर पड़कर सेक्स टाइमिंग घट जाती है।
  • अत्यधिक हस्तमैथुन या अस्वस्थ आदतें — ज्यादा हस्तमैथुन, अत्यधिक संभोग, ब्रह्मचर्य का उल्लंघन या अस्वस्थ यौन आदतें से शुक्र धातु सीधे क्षीण हो जाती है, वात दोष शुक्र में प्रवेश करता है और शीघ्रपतन की समस्या जड़ से पैदा होती है।
  • शराब, सिगरेट और नशे की चीजों का सेवन — ये सभी वात और पित्त दोष को बहुत तेजी से बढ़ाते हैं, शरीर में विष (टॉक्सिन) जमा करते हैं, शुक्र धातु को नष्ट करते हैं तथा यौन कमजोरी और जल्दी स्खलन का मुख्य कारण बनते हैं।

आयुर्वेदिक तरीके से सेक्स टाइमिंग बढ़ाने के उपाय:

आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ:

अश्वगंधा 

अश्वगंधा को आयुर्वेद में रसायन कहा जाता है। यह तनाव कम करता है, टेस्टोस्टेरोन हार्मोन बढ़ाता है, स्टैमिना और एनर्जी देता है। शीघ्रपतन में बहुत फायदेमंद क्योंकि मन शांत रहता है और शरीर मजबूत होता है।

  • उपयोग – 1 चम्मच अश्वगंधा चूर्ण गर्म दूध या शहद के साथ रात को लें। रोजाना 1-2 महीने तक।
  • फायदा – सेक्स टाइमिंग 2-3 गुना बढ़ सकती है, थकान नहीं होती।

शिलाजीत 

शिलाजीत को “पहाड़ों का रस” कहा जाता है। यह मिनरल्स से भरपूर है, टेस्टोस्टेरोन बढ़ाता है, कमजोरी दूर करता है और यौन शक्ति को कई गुना बढ़ाता है। शीघ्रपतन और कम स्टैमिना के लिए रामबाण है।

  • उपयोग – शुद्ध शिलाजीत (चावल के दाने जितना) गर्म दूध या पानी में मिलाकर सुबह लें। डॉक्टर की सलाह से शुरू करें क्योंकि तासीर गर्म है।
  • फायदा – लंबे समय तक सेक्स करने की ताकत मिलती है, वीर्य की क्वालिटी सुधरती है।

सफेद मूसली 

इसे हर्बल वियाग्रा कहा जाता है। यह शुक्र धातु बढ़ाती है, स्टैमिना देती है, शीघ्रपतन रोकती है और यौन कमजोरी दूर करती है।

  • उपयोग – 1-2 ग्राम सफेद मूसली चूर्ण दूध या शहद के साथ दिन में दो बार। कई लोग अश्वगंधा के साथ मिलाकर लेते हैं।
  • फायदा – सेक्स में ज्यादा देर टिकने की क्षमता बढ़ती है, स्पर्म काउंट भी अच्छा होता है।

सही आहार:

सेक्स टाइमिंग बढ़ाने के लिए केवल जड़ी-बूटियाँ ही नहीं, बल्कि संतुलित और पौष्टिक आहार भी उतना ही जरूरी है। आयुर्वेद सात्विक भोजन को प्राथमिकता देता है, जो शरीर को पोषण देता है और मन को शांत रखता है।

अपने आहार में शामिल करें:

  • दूध, घी, दही और पनीर
  • बादाम, अखरोट, काजू, मूंगफली
  • खजूर, अंजीर, किशमिश और शहद
  • हरी सब्जियाँ, मौसमी फल और साबुत अनाज
  • दालें, अंकुरित अनाज और बीज

इन चीजों से परहेज करें:

  • फास्ट फूड, जंक फूड और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ
  • बहुत ज्यादा मसालेदार, तली और बासी चीजें
  • अधिक चाय, कॉफी, कोल्ड ड्रिंक और मीठे पेय

योग और प्राणायाम का महत्व

योग और प्राणायाम शरीर, मन और श्वास के बीच संतुलन स्थापित करते हैं, जिससे नसों का नियंत्रण बेहतर होता है और यौन प्रदर्शन में प्राकृतिक सुधार आता है। नियमित अभ्यास से रक्त संचार बढ़ता है, तनाव कम होता है और आत्मविश्वास मजबूत होता है।

  • भस्त्रिका प्राणायाम – तेज सांसों से शरीर में प्राण ऊर्जा और ऑक्सीजन का स्तर तेजी से बढ़ता है, जिससे स्टैमिना कई गुना बढ़ता है और थकान बिना सेक्स के दौरान दूर रहती है।
  • कपालभाति – तेज सांस छोड़ने से शरीर की अशुद्धियाँ निकलती हैं, पाचन तंत्र मजबूत होता है और शुक्र धातु को बेहतर पोषण मिलता है, जिससे सेक्स में ज्यादा देर तक एनर्जी बनी रहती है।
  • मूल बंध – गुदा, जननेंद्रिय और नाभि के बीच की मांसपेशियों को सिकोड़कर पेल्विक फ्लोर को मजबूत करता है, जिससे वीर्य पर नियंत्रण बढ़ता है और सेक्स टाइमिंग में तुरंत सुधार आता है।
  • अश्विनी मुद्रा – गुदा को बार-बार सिकोड़ने-छोड़ने से यौन अंगों में रक्त संचार और मांसपेशियों की ताकत बढ़ती है, जिससे आत्मनियंत्रण आता है और शीघ्रपतन पर पूर्ण कंट्रोल मिलता है।
  • भुजंगासन – कोबरा पोज में रीढ़ की हड्डी खिंचती है और पेट-कमर के क्षेत्र में रक्त प्रवाह बढ़ता है, जिससे जनन अंगों को ज्यादा ऑक्सीजन और पोषण मिलता है तथा यौन शक्ति और टाइमिंग मजबूत होती है।

जीवनशैली में बदलाव

  • रोज 7–8 घंटे की पूरी और गहरी नींद लें – रात 10 बजे तक सोएं, सुबह 5-6 बजे उठें। नींद की कमी से वात बढ़ता है और चिंता बढ़ती है। सोने से पहले गुनगुना दूध में हल्दी या अश्वगंधा मिलाकर पिएं – यह मन को शांत करता है और गहरी नींद लाता है।
  • प्रतिदिन ध्यान और प्राणायाम करें – अनुलोम-विलोम, भ्रामरी या नाड़ी शोधन प्राणायाम 10-15 मिनट करें। ये ऑक्सीजन बढ़ाते हैं, कोर्टिसोल तनाव हार्मोन कम करते हैं और मन को वर्तमान में केंद्रित रखते हैं। ध्यान से चिंता दूर होती है और सेक्स के दौरान परफॉर्मेंस एंग्जायटी कम होती है।
  • सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास बनाए रखें – रोज सुबह 5-10 मिनट सकारात्मक बोलें या डायरी में अच्छी बातें लिखें। परिवार/पार्टनर से खुलकर बात करें। आयुर्वेद में सकारात्मक भावनाएं (प्रेम, हर्ष) सत्व बढ़ाती हैं, जो यौन शक्ति को मजबूत करती हैं।
  • मोबाइल, टीवी और सोशल मीडिया का सीमित उपयोग करें – स्क्रीन टाइम 1-2 घंटे से ज्यादा न रखें, खासकर रात में। ज्यादा स्क्रीन से नींद खराब होती है और तनाव बढ़ता है। शाम को फोन बंद करके प्रकृति में टहलें या किताब पढ़ें।
  • अपने जीवन में संतुलन और अनुशासन लाएं – नियमित दिनचर्या अपनाएं: सुबह व्यायाम, समय पर भोजन, शाम को हल्का काम। ज्यादा काम या अनियमितता से वात बढ़ता है, जो शीघ्रपतन को ट्रिगर करता है।

निष्कर्ष: 

आयुर्वेद एक ऐसी पारम्परिक चिकित्सा पद्धति है जो न आपके किसी भी प्रकार के स्वस्थ्य समस्या को जड़ से ख़त्म करता है। उन स्वस्थ्य समस्याओं में से ही एक है यौन स्वास्थ्य समस्या। यहां हम पुरुषों के यौन स्वास्थ्य के विषय में जानेंगे की किस प्रकार आयुर्वेद पुरुषों के यौन स्वास्थ्य को सुधारने में सहायता करता है। आयुर्वेद अनुसार टाइमिंग और स्टैमिना कम होने का मुख्य कारण  वात दोष, शुक्र धातु कमजोरी और तनाव हैं।

विभिन्न हर्ब्स जैसे – अश्वगंधा, शिलाजीत, सफेद मूसली एनर्जी और टेस्टोस्टेरोन बढ़ाता है, तनाव कम, स्टैमिना बूस्ट करता है। इन जड़ी-बूटियों को गर्म दूध में शहद मिलाकर रात को लें, लेकिन पहले वैद्य से जरूर सलाह लें। केगल व्यायाम और सूर्य नमस्कार करें। बादाम, अखरोट, केला, लहसुन और दूध-शहद खाएं। अच्छी नींद लें, तनाव कम करें और सिगरेट-शराब छोड़ दें। 2 से 4 हफ्ते में फायदा दिखने लगता है।