आज के समय में तनाव, गलत खान-पान, नींद की कमी, मोबाइल की लत और मानसिक दबाव के कारण युवाओं में इरेक्टाइल डिसफंक्शन (ED) या स्तंभन दोष की समस्या आम होती जा रही है। पहले आमतौर पर यह 40-50 साल से ऊपर के पुरुषों में होने वाली समस्या थी। किन्तु आजकल 20-30 साल के युवा भी इससे प्रभावित हो रहे हैं।
ED एक ऐसी स्थिति है जिसमें पुरुष को इरेक्शन पाने या बनाए रखने में कठिनाई होती है, जिससे यौन जीवन प्रभावित होता है। अच्छी बात यह है कि सही जीवनशैली, संतुलित आहार और समय पर देखभाल से इस समस्या को ठीक किया जा सकता है।
युवाओं में ED के मुख्य कारण क्या हैं?
युवाओं में ED के निम्नलिखित कारण होते हैं:
- मानसिक तनाव और चिंता – लगातार तनाव, डर और मानसिक दबाव से दिमाग शांत नहीं रहता, जिससे शरीर का यौन प्रतिक्रिया तंत्र सही तरह काम नहीं करता और इरेक्शन कमजोर या अस्थिर हो जाता है।
- गलत जीवनशैली – जंक फूड, देर रात जागना, कम शारीरिक गतिविधि और अनियमित दिनचर्या शरीर को कमजोर बनाती है, जिससे रक्त संचार घटता है और यौन क्षमता पर नकारात्मक असर पड़ता है।
- धूम्रपान और शराब – सिगरेट और शराब रक्त वाहिकाओं को संकुचित करती हैं, जिससे लिंग तक पर्याप्त रक्त नहीं पहुंच पाता और इरेक्शन पाने या बनाए रखने में कठिनाई होती है।
- नींद की कमी – पूरी और गहरी नींद न मिलने से टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का स्तर गिरता है, जिससे सेक्स ड्राइव कम होती है और इरेक्शन की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है।
- पोर्न की अधिक आदत – ज्यादा पोर्न देखने से दिमाग असली रिश्तों में उत्तेजना महसूस करना कम कर देता है, जिससे वास्तविक यौन संबंधों में इरेक्शन कमजोर या देर से आता है।
- अत्यधिक हस्तमैथुन – बार-बार हस्तमैथुन करने से मानसिक थकान, संवेदनशीलता में कमी और आत्मविश्वास घट सकता है, जो धीरे-धीरे इरेक्शन की समस्या का कारण बनता है।
- हार्मोनल असंतुलन – टेस्टोस्टेरोन या अन्य हार्मोन कम होने से यौन इच्छा घटती है, शरीर में कमजोरी आती है और इरेक्शन पाने में कठिनाई हो सकती है।
युवाओं में ED के लक्षण
- सेक्स के समय लिंग में पूरा तनाव (इरेक्शन) न आना – सबसे आम लक्षण। कभी-कभी तो इरेक्शन शुरू होता है, लेकिन पूरा सख्त नहीं होता।
- इरेक्शन आना लेकिन जल्दी ढीला पड़ जाना – शुरू में ठीक लगता है, लेकिन सेक्स के दौरान या पेनिट्रेशन से पहले ही कमजोर हो जाता है।
- बार-बार इरेक्शन न होना – हर बार यौन संबंध बनाने की कोशिश में समस्या आना। कभी-कभी होता है तो चिंता कम, लेकिन लगातार हो तो ED का संकेत।
- सुबह उठते समय इरेक्शन न होना – यह शारीरिक समस्या का बड़ा संकेत है। युवाओं में अगर सुबह इरेक्शन नहीं होता, तो जांच जरूरी।
- यौन इच्छा (सेक्स ड्राइव) कम होना – सेक्स की इच्छा ही कम लगना, या उत्साह न रहना। युवाओं में यह ज्यादातर तनाव या मानसिक कारण से होता है।
युवाओं में ED से बचाव के उपाय:
संतुलित और पौष्टिक आहार अपनाएं
आप जो खाते हैं, वही आपकी यौन शक्ति की नींव बनाता है। गलत खानपान से नसें कमजोर होती हैं और रक्त संचार बाधित होता है, जिससे स्तंभन की समस्या हो सकती है।
- कैसे मदद करता है?
फल और सब्ज़ियाँ एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती हैं, जो नसों को मजबूत बनाती हैं। प्रोटीन और स्वस्थ वसा (healthy fats) हार्मोन संतुलन बनाए रखते हैं।
- क्या खाएं?
अनार, पालक, ब्रोकली, टमाटर, अखरोट, बादाम, कद्दू के बीज, अंडा, मछली
- क्या कम करें:
जंक फूड, अत्यधिक चीनी, तला-भुना भोजन, कोल्ड ड्रिंक
नियमित व्यायाम करें
व्यायाम केवल शरीर को फिट ही नहीं रखता, बल्कि यौन स्वास्थ्य के लिए भी बेहद जरूरी है।
- कैसे मदद करता है?
व्यायाम से दिल स्वस्थ रहता है, रक्त प्रवाह बेहतर होता है और टेस्टोस्टेरोन का स्तर संतुलित रहता है, जो स्तंभन क्षमता के लिए आवश्यक है।
- क्या करें?
तेज़ चलना, दौड़ना, साइकिल चलाना, योग, वेट ट्रेनिंगविशेष योगासन: भुजंगासन, कपालभाति, सेतुबंधासन, मंडूकासन
तनाव और चिंता से दूर रहें
आज की तेज़ जीवनशैली में तनाव आम हो गया है, लेकिन यही तनाव ED का एक बड़ा कारण बन सकता है।
- कैसे नुकसान करता है?
तनाव के कारण कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ता है, जो टेस्टोस्टेरोन को दबाता है और मानसिक उत्तेजना को कम करता है।
- उपाय:
ध्यान, मेडिटेशन, गहरी सांस लेना, प्रकृति में समय बिताना, संगीत सुनना
नींद पूरी लें
नींद केवल आराम के लिए नहीं, बल्कि हार्मोन निर्माण और शरीर की मरम्मत के लिए आवश्यक है।
- कैसे मदद करती है?
रात की गहरी नींद में शरीर अधिक मात्रा में टेस्टोस्टेरोन बनाता है, जो यौन इच्छा और स्तंभन के लिए जरूरी है।
- क्या करें?
- रोज़ाना 7–8 घंटे की गुणवत्ता वाली नींद लें, सोने से पहले मोबाइल का उपयोग कम करें।
- शराब, धूम्रपान और नशे से बचें
- ये आदतें सीधे नसों और रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाती हैं।
शराब, धूम्रपान और नशे से बचें
ये आदतें सीधे नसों और रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाती हैं।
- कैसे नुकसान होता है?
धूम्रपान से रक्त प्रवाह बाधित होता है और शराब नसों की संवेदनशीलता कम करती है, जिससे स्तंभन बनाए रखना कठिन हो जाता है।
- सलाह:
- धीरे-धीरे इन आदतों को छोड़ें या पूरी तरह त्याग दें।
- स्क्रीन टाइम और पोर्न की लत कम करें
- अत्यधिक मोबाइल, लैपटॉप और पोर्न देखने से मानसिक उत्तेजना का स्तर बिगड़ सकता है।
स्क्रीन टाइम और पोर्न की लत कम करें
अत्यधिक मोबाइल, लैपटॉप और पोर्न देखने से मानसिक उत्तेजना का स्तर बिगड़ सकता है।
- कैसे असर पड़ता है?
दिमाग वास्तविक जीवन के संबंधों में उत्तेजना महसूस नहीं कर पाता, जिससे मानसिक ED विकसित हो सकता है।
- उपाय:
- डिजिटल डिटॉक्स करें, वास्तविक रिश्तों पर ध्यान दें, रचनात्मक गतिविधियों में समय बिताएं।
- आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों का सहारा लें
- आयुर्वेद में कई ऐसी जड़ी-बूटियाँ हैं जो प्राकृतिक रूप से यौन शक्ति बढ़ाती हैं।
- कैसे मदद करती हैं?
ये शरीर की ऊर्जा बढ़ाती हैं, नसों को मजबूत करती हैं और हार्मोन संतुलन में सहायता करती हैं।
आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों लें
आयुर्वेद में कई ऐसी जड़ी-बूटियाँ हैं जो प्राकृतिक रूप से यौन शक्ति बढ़ाती हैं।
- कैसे मदद करती हैं?
ये शरीर की ऊर्जा बढ़ाती हैं, नसों को मजबूत करती हैं और हार्मोन संतुलन में सहायता करती हैं।
- प्रमुख जड़ी-बूटियाँ:
- अश्वगंधा – तनाव कम करता है और टेस्टोस्टेरोन बढ़ाता है
- शिलाजीत – ऊर्जा, स्टैमिना और पुरुषत्व बढ़ाता है
- कौंच बीज – शुक्राणु और यौन क्षमता सुधारता है
- शतावरी – हार्मोन संतुलन में सहायक
- गोक्षुर – मूत्र और यौन स्वास्थ्य में लाभकारी
नियमित स्वास्थ्य जांच करवाएं
कई बार ED किसी अंदरूनी बीमारी का संकेत हो सकता है।
- कौन-सी बीमारियाँ कारण बनती हैं?
डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा, हार्मोन असंतुलन
- क्या करें:
समय-समय पर ब्लड शुगर, बीपी और हार्मोन की जांच करवाएं।
निष्कर्ष:
युवाओं में इरेक्टाइल डिसफंक्शन (ED) अब बहुत आम है, खासकर 20-35 साल के लड़कों में। तनाव, ज्यादा पॉर्न, मोटापा, धूम्रपान, शराब, कम एक्सरसाइज और खराब लाइफस्टाइल इसके मुख्य कारण हैं। अच्छी बात यह है कि ज्यादातर मामलों में यह पूरी तरह ठीक हो जाता है।
रोज एक्सरसाइज, केगेल एक्सरसाइज, स्वस्थ खाना, सिगरेट-शराब छोड़ना, अच्छी नींद और तनाव कम करना सबसे बड़ा असर करता है। शर्म छोड़कर डॉक्टर (यूरोलॉजिस्ट या सेक्सोलॉजिस्ट) से मिलें, वे सही कारण बताकर दवा या थेरेपी देंगे जिससे समय पर ध्यान देने से 90% से ज्यादा युवा नॉर्मल जीवन जीते हैं।

