आज के समय में कई लोग अपनी सेक्स लाइफ को लेकर तनाव और चिंता महसूस करते हैं, भले ही वे शारीरिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ हों। अक्सर समस्या शरीर में नहीं, बल्कि दिमाग में होती है। इसी मानसिक स्थिति को परफॉर्मेंस एंग्जायटी कहा जाता है। इसमें व्यक्ति अच्छा प्रदर्शन करने के दबाव में इतना उलझ जाता है कि उसका आत्मविश्वास और अनुभव दोनों प्रभावित हो जाते हैं।
परफॉर्मेंस एंग्जायटी क्या है?
परफॉर्मेंस एंग्जायटी का मतलब है सेक्स के समय अच्छा प्रदर्शन करने को लेकर डर, घबराहट या चिंता महसूस करना। व्यक्ति बार-बार सोचता है कि वह अपने पार्टनर को संतुष्ट कर पाएगा या नहीं। यही डर धीरे-धीरे तनाव में बदल जाता है, जिससे शरीर सही प्रतिक्रिया नहीं दे पाता और समस्या बढ़ जाती है।
परफॉर्मेंस एंग्जायटी के लक्षण क्या होते हैं?
- सेक्स शुरू होने से पहले या बीच में ही पेनिस का इरेक्शन कमजोर पड़ना या बिल्कुल खड़ा न होना
- बहुत जल्दी स्खलन (Premature Ejaculation) होना
- सेक्स के दौरान ध्यान भटकना – “कितना टाइम हो गया?”, “वो खुश है या नहीं?”
- दिल की धड़कन तेज होना, पसीना आना, हाथ-पैर ठंडे पड़ना
- सेक्स के बाद अपराधबोध या शर्मिंदगी महसूस होना
- बार-बार सेक्स से बचने की कोशिश करना
इस समस्या के मुख्य कारण:
- सामाजिक और सांस्कृतिक दबाव – हमारी सोसाइटी में पुरुष को “मर्द” तभी माना जाता है जब वो लंबे समय तक, जोरदार तरीके से और हर बार परफेक्ट सेक्स करे। ये गलत धारणा बहुत गहरी जड़ें जमाए हुए है।
- पॉर्न का गलत प्रभाव – पॉर्न में 30-40 मिनट तक बिना रुके, हर पोजिशन में परफॉर्मेंस दिखाई जाती है। रियल लाइफ में ऐसा बहुत कम होता है। फिर भी लोग खुद से तुलना करते हैं और फेल महसूस करते हैं।
- पिछले खराब अनुभव – अगर एक-दो बार इरेक्शन नहीं हुआ या जल्दी खत्म हो गया, तो अगली बार वही डर दिमाग में बैठ जाता है। ये डर चक्र बन जाता है।
- रिलेशनशिप में कम्युनिकेशन की कमी – पार्टनर से खुलकर बात न करना, अपनी कमजोरी छुपाना, ये सब टेंशन को और बढ़ाता है।
- रोजमर्रा का तनाव – नौकरी, पैसा, फैमिली, फ्यूचर की चिंता – ये सारी चीजें टेस्टोस्टेरोन लेवल को कम करती हैं और सेक्सुअल परफॉर्मेंस पर असर डालती हैं।
इसे कैसे दूर करें?
- सबसे पहले दिमाग को रीसेट करें
सेक्स को परीक्षा या प्रदर्शन की तरह न देखें। यह कोई प्रतियोगिता नहीं है। खुद पर से दबाव हटाएं और यह स्वीकार करें कि कभी-कभी दिक्कत आना सामान्य है। सकारात्मक सोच रखें और खुद को कमजोर महसूस न करें। जब दिमाग शांत होगा, तब शरीर भी बेहतर तरीके से प्रतिक्रिया देगा।
- पार्टनर के साथ ईमानदार बातचीत करें
अपनी चिंता और डर को छुपाने के बजाय पार्टनर से खुलकर बात करें। उन्हें बताएं कि आप तनाव महसूस करते हैं। इससे रिश्ता मजबूत होगा और आपके मन का बोझ हल्का होगा। जब पार्टनर समझदार और सहयोगी होता है, तो आत्मविश्वास अपने आप बढ़ने लगता है।
- फोरप्ले को सबसे महत्वपूर्ण बनाएं
सेक्स से पहले प्यार, छूना, बातें करना और समय देना बहुत जरूरी है। जल्दबाज़ी न करें। फोरप्ले शरीर और दिमाग दोनों को तैयार करता है, जिससे तनाव कम होता है और आनंद बढ़ता है। जब माहौल आरामदायक होता है, तो परफॉर्मेंस की चिंता खुद-ब-खुद कम हो जाती है।
- सांस और रिलैक्सेशन टेक्निक सीखें
घबराहट होने पर गहरी सांस लें और धीरे-धीरे छोड़ें। आंखें बंद कर शांत संगीत सुनें या ध्यान करें। यह मन को शांत करता है और शरीर को आराम देता है। रोज 5–10 मिनट की रिलैक्सेशन प्रैक्टिस तनाव कम करती है और आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद करती है।
- केगल एक्सरसाइज रोज करें
केगल एक्सरसाइज पेल्विक मसल्स को मजबूत करती है, जो सेक्स परफॉर्मेंस के लिए जरूरी होती हैं। इसे कहीं भी, कभी भी किया जा सकता है। रोज 5–10 मिनट अभ्यास करने से नियंत्रण बढ़ता है, टाइमिंग बेहतर होती है और आत्मविश्वास में सुधार आता है।
- लाइफस्टाइल में छोटे-छोटे बदलाव
अच्छी नींद लें, हेल्दी खाना खाएं, शराब और धूम्रपान से दूरी बनाएं। रोज थोड़ा व्यायाम और योग करें। ये छोटे बदलाव शरीर और मन दोनों को स्वस्थ बनाते हैं। जब शरीर फिट होता है, तो मन भी मजबूत होता है और परफॉर्मेंस एंग्जायटी कम होती है।
- सेक्स को धीरे-धीरे फिर से शुरू करें
खुद पर जल्दी ठीक होने का दबाव न डालें। शुरुआत में सिर्फ पास बैठना, बात करना, हाथ पकड़ना जैसे छोटे कदम लें। धीरे-धीरे आगे बढ़ें। इससे डर कम होता है और आत्मविश्वास बढ़ता है। जब आप आराम से आगे बढ़ते हैं, तो अनुभव भी बेहतर होता है।
- जरूरत पड़े तो प्रोफेशनल मदद लें
अगर समस्या लंबे समय तक बनी रहे, तो डॉक्टर, सेक्स काउंसलर या थेरेपिस्ट से बात करें। यह कमजोरी नहीं, बल्कि समझदारी का कदम है। प्रोफेशनल मार्गदर्शन से सही कारण पता चलता है और समाधान जल्दी मिलता है, जिससे आप सामान्य जीवन फिर से जी सकते हैं।
निष्कर्ष:
परफॉर्मेंस एंग्जायटी कोई गंभीर बीमारी नहीं, बल्कि मन से जुड़ी एक सामान्य स्थिति है, जिसे सही सोच और सही तरीकों से पूरी तरह दूर किया जा सकता है। जब हम खुद पर से परफेक्ट परफॉर्म करने का दबाव हटाते हैं और सेक्स को आनंद और जुड़ाव के रूप में देखते हैं, तो तनाव अपने आप कम होने लगता है।
पार्टनर के साथ खुलकर बातचीत करना, फोरप्ले को महत्व देना, योग और सांस की तकनीक अपनाना और स्वस्थ जीवनशैली बनाए रखना इसमें बहुत मदद करता है। जरूरत पड़ने पर प्रोफेशनल काउंसलिंग लेना भी बिल्कुल सही और समझदारी भरा कदम है। याद रखें, आप अकेले नहीं हैं और यह समस्या अस्थायी है। धैर्य, समझ और आत्मविश्वास के साथ आप फिर से एक स्वस्थ, संतुलित और सुखद यौन जीवन जी सकते हैं।

