इरेक्टाइल डिस्फंक्शन (ED), जिसे आम बोलचाल में स्तंभन दोष या नपुंसकता भी कहते हैं, एक बहुत आम समस्या है। इसमें पुरुष को यौन संबंध के लिए लिंग में काफी सख्त इरेक्शन (erection) नहीं हो पाता या उसे लंबे समय तक बनाए रखने में दिक्कत होती है। यह समस्या उम्र बढ़ने के साथ ज्यादा आम हो जाती है, लेकिन आजकल 30-40 साल के युवाओं में भी देखी जा रही है।
हम इस लेख में इससे सम्बंधित आवश्यक जानकारी देने जा रहे हैं जो आपको इस समस्या को और अच्छे से समझने में सहायता करेगी।
इरेक्टाइल डिस्फंक्शन क्या है ?
सरल भाषा में कहें तो इरेक्टाइल डिस्फंक्शन (ईडी), जिसे हिंदी में स्तंभन दोष कहते हैं, एक बहुत आम पुरुष यौन समस्या है। इसमें पुरुष को यौन संबंध बनाने के लिए लिंग में पर्याप्त कठोरता (इरेक्शन) पैदा करने में दिक्कत होती है या फिर इरेक्शन होने के बाद उसे लंबे समय तक बनाए रखना मुश्किल हो जाता है। यह समस्या किसी भी उम्र में हो सकती है, हालांकि उम्र बढ़ने के साथ इसकी संभावना ज्यादा हो जाती है। यह मुख्यतः डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल, हार्मोन असंतुलन, मोटापा, धूम्रपान, ज्यादा शराब पीना या दिल की बीमारी इत्यादि कारणों से हो सकती है।
इरेक्टाइल डिस्फंक्शन (ED) के मुख्य लक्षण
- लिंग में इरेक्शन (सख्त होना) न होना या बहुत कमजोर होना – यौन उत्तेजना होने के बावजूद लिंग पर्याप्त सख्त नहीं हो पाता, जिससे सेक्स करना मुश्किल हो जाता है।
- इरेक्शन तो होना लेकिन सेक्स के लिए पर्याप्त सख्त न होना – लिंग में कुछ हद तक सख्ती आती है, पर वह इतनी मजबूत नहीं होती कि प्रवेश (penetration) आसानी से हो सके।
- इरेक्शन जल्दी ढीला पड़ जाना – शुरुआत में सख्ती होती है, लेकिन सेक्स के दौरान या उससे पहले ही लिंग ढीला हो जाता है और प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती।
- यौन इच्छा (सेक्स की चाहत) में कमी आना – पहले जैसी यौन इच्छा या libido नहीं रहती, जिससे सेक्स में रुचि कम हो जाती है। (यह अक्सर ED के साथ जुड़ा होता है।)
- रोजमर्रा की सुबह की इरेक्शन (Morning erection) का कम या गायब होना – सुबह उठने पर स्वाभाविक रूप से होने वाली इरेक्शन बहुत कम या बिल्कुल नहीं होती, जो ED का एक महत्वपूर्ण संकेत है।
इरेक्टाइल डिस्फंक्शन (ED) के मुख्य कारण – शारीरिक और मानसिक
शारीरिक कारण (Physical Causes)
- डायबिटीज – उच्च ब्लड शुगर नसों और रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाता है, जिससे लिंग में खून का प्रवाह कम हो जाता है।
- हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप) – धमनियों को सख्त और संकुचित करता है, जिससे लिंग तक पर्याप्त रक्त नहीं पहुंच पाता।
- हृदय रोग और कोलेस्ट्रॉल की समस्या – धमनियों में जमा प्लाक रक्त प्रवाह को रोकता है, जो इरेक्शन के लिए जरूरी है।
- मोटापा – हार्मोन असंतुलन, टेस्टोस्टेरोन कम होना और रक्त संचार में कमी पैदा करता है।
- कम टेस्टोस्टेरोन स्तर – सेक्स हार्मोन की कमी से यौन इच्छा और इरेक्शन क्षमता दोनों प्रभावित होती है।
- धूम्रपान – रक्त वाहिकाओं को संकुचित करता है और लिंग में रक्त प्रवाह को स्थायी रूप से कम कर देता है।
- ज्यादा शराब का सेवन – तंत्रिका तंत्र और हार्मोन को प्रभावित कर इरेक्शन प्रक्रिया को बाधित करता है।
- कुछ दवाइयाँ – ब्लड प्रेशर, डिप्रेशन, प्रोस्टेट या बालों की दवाएं साइड इफेक्ट के रूप में ED पैदा कर सकती हैं।
- प्रोस्टेट सर्जरी या चोट – नसों और रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचने से इरेक्शन की क्षमता प्रभावित होती है।
मानसिक कारण (Psychological Causes)
- तनाव और चिंता – दिमाग में तनाव हार्मोन बढ़ाता है, जो यौन उत्तेजना को ब्लॉक कर देता है।
- डिप्रेशन – मूड और इच्छा दोनों को कम कर देता है, जिससे यौन प्रतिक्रिया प्रभावित होती है।
- परफॉर्मेंस एंग्जाइटी – “क्या मैं अच्छा परफॉर्म कर पाऊंगा?” वाला डर इरेक्शन को रोक देता है।
- रिलेशनशिप में समस्या – पार्टनर के साथ झगड़े, भावनात्मक दूरी या विश्वास की कमी से यौन प्रदर्शन प्रभावित होता है।
- पिछला ट्रॉमा या बुरी यादें – यौन शोषण या असफल अनुभवों का डर लंबे समय तक ED का कारण बन सकता है।
ज्यादातर मामलों में शारीरिक और मानसिक कारण एक साथ काम करते हैं। उदाहरण के लिए – डायबिटीज की वजह से ED शुरू होता है, फिर “अब क्या होगा” वाली चिंता से समस्या और बढ़ जाती है।
इरेक्टाइल डिस्फंक्शन (ED) के आयुर्वेदिक इलाज
आयुर्वेद में इरेक्टाइल डिस्फंक्शन को क्लैब्य कहा जाता है। यह मुख्य रूप से वात दोष के असंतुलन, शुक्र धातु की कमजोरी और तनाव से जुड़ा होता है। आयुर्वेद का फोकस सिर्फ लक्षणों पर नहीं, बल्कि मूल कारण (जैसे तनाव, कमजोर रक्त संचार, हार्मोन असंतुलन) को ठीक करने पर होता है।
- अश्वगंधा – तनाव और चिंता कम करता है, टेस्टोस्टेरोन बढ़ाता है, यौन इच्छा और इरेक्शन में सुधार लाता है। रोज 1-2 ग्राम पाउडर दूध के साथ लें।
- सफेद मूसली – बहुत शक्तिशाली वाजीकरण (aphrodisiac) जड़ी-बूटी। स्टैमिना, स्पर्म काउंट और इरेक्शन की ताकत बढ़ाती है। 1 चम्मच पाउडर घी-मिश्री के साथ लें।
- शिलाजीत – प्राकृतिक मिनरल्स से भरपूर, रक्त संचार सुधारता है, एनर्जी और टेस्टोस्टेरोन बढ़ाता है। शुद्ध शिलाजीत 250-500 mg रोज दूध में।
- गोखरू – टेस्टोस्टेरोन और यौन शक्ति बढ़ाता है, मूत्र और प्रजनन तंत्र को मजबूत करता है। पाउडर या चाय के रूप में लें।
- कौंच बीज – डोपामाइन बढ़ाता है, सेक्स ड्राइव और इरेक्शन में मदद करता है। 3-5 ग्राम पाउडर दूध के साथ लें।
- शतावरी – हार्मोन बैलेंस करता है, तनाव कम करता है और शुक्र धातु को पोषण देता है।
घरेलू और जीवनशैली आधारित आयुर्वेदिक उपाय
- वाजीकरण आहार – दूध, घी, बादाम, अखरोट, खजूर, अनार, केला, अदरक, लहसुन, प्याज का रस + शहद रोज लें। ज्यादा नमकीन, खट्टा, भारी भोजन से बचें।
- योग और व्यायाम – भुजंगासन, धनुरासन, सर्वांगासन, केगेल एक्सरसाइज (पेल्विक फ्लोर मजबूत करने के लिए) रोज 20-30 मिनट।
- तनाव कम करें – प्राणायाम (अनुलोम-विलोम), ध्यान और अच्छी नींद। तनाव ED का सबसे बड़ा कारण है।
- पंचकर्म थेरेपी – अगर समस्या गंभीर है तो आयुर्वेदिक क्लिनिक में बस्ती (एनिमा) या अन्य detoxification थेरेपी करवाएं।
- रोजाना रूटीन – सुबह जल्दी उठें, तेल मालिश (अभ्यंग), ठंडा पानी न नहाएं, ज्यादा शराब-धूम्रपान से बचें।
इरेक्टाइल डिस्फंक्शन (ED) के इलाज और बचाव के दौरान अपने जाने वाली महत्वपूर्ण सावधानियां:
- डॉक्टर की सलाह के बिना Viagra या कोई ED दवा कभी न लें इससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ सकता है।
- ED को उम्र की वजह से नजरअंदाज न करें, यह हृदय रोग या डायबिटीज का पहला संकेत हो सकता है।
- धूम्रपान पूरी तरह बंद करें क्योंकि यह रक्त वाहिकाओं को स्थायी नुकसान पहुंचाता है।
- ज्यादा शराब का सेवन बिल्कुल न करें, यह इरेक्शन क्षमता को स्थायी रूप से कमजोर करता है।
- बिना ब्लड टेस्ट के टेस्टोस्टेरोन थेरेपी या हार्मोन सप्लीमेंट न शुरू करें क्योंकि यह कैंसर और दिल की समस्या का जोखिम बढ़ता है।
- 3-6 महीने से समस्या बनी हो तो खुद इलाज न करें, इसके लिए यूरोलॉजिस्ट से जांच जरूरी है।
- मिलावटी आयुर्वेदिक प्रोडक्ट्स (शिलाजीत, मूसली आदि) न खरीदें क्योंकि इससे किडनी-लिवर को नुकसान हो सकता है।
- सेक्स के दौरान परफॉर्मेंस का दबाव न लें, इससे एंग्जाइटी और बढ़ जाती है।
निष्कर्ष
इरेक्टाइल डिस्फंक्शन एक बहुत आम और पूरी तरह ठीक होने वाली समस्या है, जो डायबिटीज, हाई बीपी, धूम्रपान, तनाव या हार्मोन असंतुलन जैसी वजहों से होती है। यह शर्म की बात नहीं, बल्कि शरीर का संकेत है कि कुछ बदलाव की जरूरत है। सही समय पर डॉक्टर से जांच करवाकर, जीवनशैली सुधारकर (व्यायाम, वजन कम करना, धूम्रपान छोड़ना), दवाइयों या आयुर्वेदिक उपायों (अश्वगंधा, शिलाजीत आदि) से 70-90% पुरुषों को अच्छा सुधार मिलता है। सबसे जरूरी है – बिना डॉक्टर की सलाह के कोई दवा न लें, ED को हृदय रोग का पहला संकेत समझें और देरी न करें। समय पर मदद लें, तो आप फिर से आत्मविश्वास और खुशहाल यौन जीवन जी सकते हैं

