आज की बदलती लाइफ़स्टाइल, तनाव, असंतुलित खान-पान और बढ़ती बीमारियों के कारण फर्टिलिटी पर सीधी चोट पड़ती है, खासतौर पर पुरुषों में। इसे हम “पुरुष बांझपन” या फर्टिलिटी कहते हैं – यह कोई शर्म की बात नहीं, बल्कि ठीक हो सकने वाली दिक्कत है। फर्टिलिटी (Fertility) का मतलब है संतान पैदा करने की प्राकृतिक क्षमता। यह पुरुष और महिला दोनों पर लागू होती है, क्योंकि गर्भधारण एक संयुक्त प्रक्रिया है।
यह ब्लॉग आपको सरल भाषा में बताएगा फर्टिलिटी क्या होती है, पुरुषों में बांझपन क्या होता है, इसके कारण, लक्षण और समाधान क्या हैं।
फर्टिलिटी क्या होती है?
फर्टिलिटी यानी किसी पुरुष या महिला की प्राकृतिक रूप से बच्चा पैदा करने की क्षमता। यह कई चीज़ों पर निर्भर करती है:
- पर्याप्त मात्रा में स्वस्थ शुक्राणु (Sperm Count)
- शुक्राणुओं की सही आकृति (Sperm Morphology)
- तेज़ तैरने की क्षमता (Sperm Motility)
- स्वस्थ हार्मोन स्तर – खासतौर पर टेस्टोस्टेरोन
- स्वस्थ टेस्टिकल्स और प्रजनन नलिकाएँ
पुरुषों में बांझपन का क्या मतलब है?
पुरुषों में बांझपन (Male Infertility) वह स्थिति है, जिसमें पुरुष के शुक्राणु अंडाणु को सफलतापूर्वक निषेचित नहीं कर पाते, जिसके कारण गर्भधारण नहीं होता। सरल शब्दों में बोले तो एक साल तक नियमित कोशिश के बावजूद पत्नी को गर्भ नहीं ठहरता क्योंकि स्पर्म में कोई न कोई दिक्कत होती है – जैसे स्पर्म बहुत कम होना, कमजोर होना, गलत शक्ल के होना या बिल्कुल न बनना, इसे ही पुरुष बांझपन कहते हैं।
यह कोई बीमारी नहीं है बल्कि लाखों मर्दों में होने वाली बस एक सामान्य स्वास्थ्य समस्या है जो हार्मोन असंतुलन, इन्फेक्शन, जीवनशैली (जैसे स्मोकिंग, मोटापा, तनाव) या जेनेटिक कारणों से हो सकती है। ज्यादातर मामलों में विभिन्न इलाजों जैसे जीवनशैली बदलाव, दवाइयाँ, वैरिकोसील का छोटा सर्जरी, या एडवांस्ड तरीके जैसे IUI, IVF द्वारा इसे ठीक किया जा सकता है।
पुरुषों में बांझपन के मुख्य कारण
अंडकोष का ज्यादा गर्म रहना
स्पर्म को ठंडक चाहिए, गर्मी में मर जाते हैं। टाइट कपड़े, लंबे समय बैठकर गाड़ी चलाना या लैपटॉप गोद में रखना अंडकोष को गर्म करता है, इसलिए स्पर्म कम और कमजोर हो जाते हैं।
वैरिकोसील (नसों में गांठ)
अंडकोष के आसपास की नसें फूल जाती हैं, खून जमा रहता है, तापमान बढ़ जाता है। 40% बांझ पुरुषों को यही समस्या होती है, छोटा ऑपरेशन करने से अक्सर सब ठीक हो जाता है।
सिगरेट, शराब, गुटखा, गांजा
इनमें मौजूद जहर सीधे स्पर्म को मारते हैं और नई स्पर्म बनने नहीं देते। छोड़ने के 3-6 महीने बाद ही स्पर्म फिर से अच्छे होने लगते हैं।
मोटापा
पेट पर ज्यादा चर्बी जमा होने से टेस्टोस्टेरोन हार्मोन कम बनता है। वजन 10-15 किलो कम करने से अपने आप स्पर्म बढ़ जाते हैं।
पुराना इन्फेक्शन या गुप्त रोग
मम्प्स, गोनोरिया, क्लेमाइडिया जैसी बीमारियाँ नलियाँ बंद कर देती हैं या अंडकोष को नुकसान पहुँचाती हैं।
बॉडी बनाने की स्टेरॉइड दवाएँ
जिम में लिए जाने वाले इंजेक्शन शरीर को बाहर से हार्मोन दे देते हैं, अपना टेस्टोस्टेरोन बंद हो जाता है, स्पर्म बनना रुक जाता है।
तनाव और नींद की कमी
दिमाग ज्यादा परेशान रहता है तो स्ट्रेस हार्मोन बढ़ जाते हैं, जो स्पर्म बनाने वाले हार्मोन को दबा देते हैं।
डायबिटीज (शुगर)
शुगर ज्यादा रहने से नसें खराब हो जाती हैं और स्पर्म तक खून-पोषण ठीक से नहीं पहुँचता।
जन्म से कोई कमी
कुछ मर्दों में स्पर्म को बाहर लाने वाली दोनों नलियाँ जन्म से गायब होती हैं, इसे CFTR जीन की समस्या कहते हैं।
बढ़ती उम्र
40 साल के बाद हर साल स्पर्म की ताकत और संख्या अपने आप 1-2% कम होती जाती है।
पुरुष बांझपन के लक्षण
ज्यादातर मामलों में कोई बाहरी लक्षण नहीं दिखता लेकिन कुछ संकेत मिल सकते हैं:
- सेक्स इच्छा में कमी
- टेस्टोस्टेरोन कम होना
- इरेक्शन में समस्या
- अंडकोष में दर्द या सूजन
- शुक्राणु कम होना
फर्टिलिटी बढ़ाने के प्राकृतिक उपाय
सिगरेट-शराब-गुटखा तुरंत बंद करें
इनसे शुक्राणु की संख्या, गुणवत्ता और हार्मोन लेवल बुरी तरह गिरते हैं। इन्हें छोड़ते ही Sperm Count स्वाभाविक रूप से बढ़ने लगता है।
पेट कम करें, 8–10 किलो वजन घटाएं
ओवरवेट होने से टेस्टोस्टेरोन कम होता है और शुक्राणु बनने की क्षमता घटती है। वजन कम करने से हार्मोन जल्दी बैलेंस होते हैं।
ढीले कपड़े पहनें, अंडकोष ठंडे रखें
टाइट कपड़े और ज्यादा गर्मी sperm production को धीमा कर देते हैं। ढीले कपड़े पहनने से टेस्टिकल्स का तापमान सामान्य रहता है।
रोज 7–8 घंटे पूरी नींद लें
नींद पूरी होने पर टेस्टोस्टेरोन प्राकृतिक रूप से बढ़ता है और शुक्राणुओं की क्वालिटी भी सुधरती है।
बादाम, अखरोट, पालक और अंडा रोज खाएं
इनमें मौजूद ओमेगा-3, जिंक, फोलेट और प्रोटीन sperm motility, count और morphology सुधारते हैं।
रोज 30 मिनट टहलें, तनाव कम करें
हल्का व्यायाम तनाव घटाता है और शरीर में रक्त प्रवाह बढ़ाता है, जिससे प्रजनन स्वास्थ्य बेहतर होता है।
2–3 दिन छोड़कर सेक्स करें
बहुत ज़्यादा बार सेक्स करने से sperm count हर बार थोड़ा कम निकलता है। 2–3 दिन गैप देने से sperm की संख्या और गुणवत्ता दोनों बढ़ती हैं।
निष्कर्ष (Conclusion)
फर्टिलिटी यानी बच्चे पैदा करने की प्राकृतिक क्षमता, और जब किसी पुरुष के शुक्राणु अंडाणु को निषेचित नहीं कर पाते, तो उसे पुरुष बांझपन कहा जाता है। यह समस्या आजकल तनाव, गलत खान-पान, नशा, मोटापा और हार्मोनल गड़बड़ी जैसे कारणों से तेजी से बढ़ रही है। अच्छी बात यह है कि पुरुष फर्टिलिटी को सही देखभाल से काफी हद तक सुधारा जा सकता है।
स्वस्थ जीवनशैली अपनाना, पौष्टिक आहार लेना, नशा छोड़ना, तनाव नियंत्रित करना, नियमित व्यायाम करना और जरूरत पड़ने पर आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों या चिकित्सा की मदद लेना, इन सभी से प्रजनन क्षमता में प्राकृतिक रूप से सुधार संभव है।

