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शीघ्रपतन रोकने में कारगर आयुर्वेदिक नुस्खे

परिचय :

शीघ्रपतन आज के समय में पुरुषों में सबसे आम यौन समस्याओं में से एक है। जल्दी स्खलन होने से न केवल अंतरंग संबंध प्रभावित होते हैं बल्कि आत्मविश्वास, मानसिक शांति और जोश भी कम होता है। आयुर्वेद इस समस्या का प्राकृतिक, सुरक्षित और दीर्घकालिक समाधान प्रदान करता है, जिसमें जड़ी-बूटियों, दिनचर्या और खानपान का खास योगदान है।

शीघ्रपतन क्या है?

शीघ्रपतन (Premature Ejaculation) पुरुषों की एक आम यौन समस्या है, जिसमें संभोग के दौरान बहुत जल्दी वीर्य स्खलन हो जाता है। इससे पुरुष और उसकी साथी दोनों को पूर्ण संतुष्टि नहीं मिल पाती। यह समस्या कभी-कभी होना सामान्य है, लेकिन अगर यह बार-बार हो रही हो तो इलाज जरूरी है। अच्छी बात यह है कि आयुर्वेद में इसके लिए बहुत प्रभावी, सुरक्षित और प्राकृतिक उपाय मौजूद हैं।

शीघ्रपतन के मुख्य कारण

  • मानसिक तनाव, चिंता, डिप्रेशन
  • कमजोर नसें और धातु की कमजोरी
  • वात दोष का बढ़ना
  • अत्यधिक हस्तमैथुन या गलत खान-पान
  • हार्मोन असंतुलन या कमजोर पाचन तंत्र
  • थकान, नींद की कमी और व्यायाम न करना

शीघ्रपतन में आयुर्वेद का महत्व

आयुर्वेद शीघ्रपतन को “धातु की शिथिलता” और “वात दोष विकृति” मानता है। यह जड़ से इलाज करता है – नसों को मजबूत बनाता है, वीर्य को गाढ़ा और स्थायी बनाता है, मन को शांत करता है और यौन शक्ति को लंबे समय तक बढ़ाता है। रासायनिक दवाओं की तरह इसके कोई साइड इफेक्ट नहीं होते।

शीघ्रपतन रोकने में सबसे कारगर आयुर्वेदिक नुस्खे

आयुर्वेद इस समस्या को वात दोष की अधिकता और शुक्र धातु की कमजोरी मानता है तथा अश्वगंधा, शतावरी, कौंच बीज, शिलाजीत जैसे शुद्ध रसायनों से इसमें लाभ पहुंचाता है।  

1. अश्वगंधा + शतावरी + कौंच बीज का चूर्ण

फायदें:

यह त्रिदोष नाशक मिश्रण है। अश्वगंधा तनाव कम करती है, शतावरी शुक्र धातु को पोषण देती है और कौंच बीज वीर्य की मात्रा-गुणवत्ता बढ़ाकर समय को 5-10 मिनट तक बढ़ा देता है।

बनाने की विधि:

तीनों को बराबर मात्रा (100-100 ग्राम) लेकर बारीक चूर्ण बना लें।

सेवन विधि:

रात को सोते समय 1 चम्मच (5 ग्राम) चूर्ण गुनगुने दूध के साथ लें। 45-60 दिन तक नियमित लें। बहुत अच्छा रिजल्ट मिलता है।

2. जटामांसी + ब्राह्मी + शंखपुष्पी चूर्ण

फायदें:

यह मिश्रण दिमाग की अतिरिक्त उत्तेजना को शांत करता है, चिंता-तनाव दूर करता है और संभोग के समय कंट्रोल बढ़ाता है। जो लोग घबराहट की वजह से जल्दी झड़ जाते हैं, उनके लिए रामबाण है।

बनाने की विधि:

जटामांसी, ब्राह्मी और शंखपुष्पी को बराबर मात्रा में मिलाकर चूर्ण बना लें।

सेवन विधि:

सुबह-शाम आधा-आधा चम्मच गाय के घी या शहद के साथ लें। 30-40 दिन में फर्क साफ दिखेगा।

3. विदारीकंद + शतावरी मिश्रण

फायदें:

विदारीकंद और शतावरी, शुक्र स्तंभक और वाजीकरन का बेहतरीन संयोग। वीर्य को गाढ़ा करता है, नसों में ताकत लाता है और समय को दोगुना तक बढ़ा देता है।

बनाने की विधि:

दोनों का बारीक चूर्ण बराबर मात्रा में मिलाएं।

सेवन विधि:

1 चम्मच चूर्ण सुबह खाली पेट गुनगुने दूध से लें। ऊपर से मिश्री मिलाया हुआ दूध पी सकते हैं।

4. अकरकरा + अश्वगंधा + शतावरी

फायदें:

अकरकरा लिंग की नसों को मजबूत बनाता है, संवेदना को नियंत्रित करता है, जिससे शीघ्रपतन पर तुरंत काबू पाया जाता है।

बनाने की विधि:

अकरकरा 50 ग्राम, अश्वगंधा 100 ग्राम, शतावरी 100 ग्राम – सब मिलाकर चूर्ण बना लें।

सेवन विधि:

रात को 1 चम्मच गर्म दूध के साथ। 30-45 दिन में जबरदस्त फायदा।

5. मूसली पाक

फायदे:

सफेद मूसली, अश्वगंधा, शतावरी, गोखरू आदि से बना यह पाक यौन शक्ति का खजाना है। समय बढ़ाने के साथ-साथ इरेक्शन भी पत्थर जैसा बनाता है।

बनाने की विधि:

सुबह-शाम 1-1 चम्मच गाय के दूध के साथ। बाजार में अच्छी कंपनी का असली मूसली पाक ही लें।

6. शुद्ध शिलाजीत

फायदे:

शिलाजीत शुक्र धातु को बल देता है, टेस्टोस्टेरोन बढ़ाता है और शीघ्रपतन को जड़ से खत्म करता है।

बनाने की विधि:

मटर के दाने जितना शिलाजीत (250-500 मिलीग्राम) सुबह खाली पेट गुनगुने दूध में घोलकर पिएं। 40-60 दिन तक लगातार लें।

जरूरी सावधानियां

  1. सभी जड़ी-बूटियां शुद्ध और अच्छी कंपनी की ही लें।
  2. अधिक मात्रा न लें, वरना गर्मी या सिर दर्द हो सकता है।
  3. शराब, सिगरेट, तंबाकू, तेज मिर्च-मसाले पूरी तरह बंद करें।
  4. रात को हल्का भोजन करें, देर रात तक जागना बंद करें।
  5. रोज 30 मिनट व्यायाम और प्राणायाम जरूर करें।
  6. अगर डायबिटीज या उच्च रक्तचाप है तो पहले आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह लें।

निष्कर्ष

शीघ्रपतन कोई लाइलाज बीमारी नहीं है। यह एक ऐसी समस्या है जिसे सही आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों और संतुलित जीवनशैली से प्राकृतिक रूप से नियंत्रित किया जा सकता है। अश्वगंधा, शतावरी, कौंच बीज, और शिलाजीत जैसे उपाय लंबे समय तक सुरक्षित और प्रभावी परिणाम देते हैं।

आयुर्वेद के इन सरल और सटीक नुस्खों से 1-2 महीने में आप अपनी पुरानी ताकत वापस पा सकते हैं। बस धैर्य रखें, नियमित सेवन करें और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं। कुछ ही हफ्तों में आप खुद फर्क महसूस करेंगे।